“ पापा, आपके हिस्से की उम्र ”
_______________________________________________________________________ “ पापा , आपके हिस्से की उम्र ” ______________________________________________________________ ( पिता श्री निलेश जैन के चौवनवें जन्मदिवस ( 15 अक्टूबर 2026) पर : एक पुत्र की ओर से ) हमें हर थकन से बचाते रहे हैं , मगर अपनी रातें गँवाते रहे हैं। ये चौवन बरस भी कहाँ अपने ठहरे , हमारी ख़ुशी पर लुटाते रहे हैं। फ़क़त तीस वर्षों का अंतर नहीं है , हमें अपना बचपन थमाते रहे हैं। कभी चाह कर भी न रो पाए खुलकर , ज़माने का फ़रमाँ निभाते रहे हैं। कभी अपना दुख भी सुनाया न मुझको , मगर आप सबको हँसाते रहे हैं। न पूछा कभी ख़ुद कि क्या चाहते हैं , हमारे लिए सुख जुटाते रहे हैं। फ़रिश्ता नहीं , आप भी तो बशर हैं , मगर ख़ुद को पत्थर बनाते रहे हैं। अधूरी तमन्ना अभी तक जवाँ है , जिसे आप हर दिन भुलाते रहे हैं। जन्मद...