“ पापा, आपके हिस्से की उम्र ”

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“ पापा, आपके हिस्से की उम्र ”
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( पिता श्री निलेश जैन के चौवनवें जन्मदिवस (15 अक्टूबर 2026) पर:

एक पुत्र की ओर से )


हमें हर थकन से बचाते रहे हैं,

मगर अपनी रातें गँवाते रहे हैं।

 

ये चौवन बरस भी कहाँ अपने ठहरे,

हमारी ख़ुशी पर लुटाते रहे हैं।

 

फ़क़त तीस वर्षों का अंतर नहीं है,

हमें अपना बचपन थमाते रहे हैं।

 

कभी चाह कर भी न रो पाए खुलकर,

ज़माने का फ़रमाँ निभाते रहे हैं।

 

कभी अपना दुख भी सुनाया न मुझको,

मगर आप सबको हँसाते रहे हैं।

 

न पूछा कभी ख़ुद कि क्या चाहते हैं,

हमारे लिए सुख जुटाते रहे हैं।

 

फ़रिश्ता नहीं, आप भी तो बशर हैं,

मगर ख़ुद को पत्थर बनाते रहे हैं।

 

अधूरी तमन्ना अभी तक जवाँ है,

जिसे आप हर दिन भुलाते रहे हैं।

 

जन्मदिन मुबारक कहा है सभी ने,

थके दिल को फिर भी मनाते रहे हैं।

 

मुझे अब वो कंधे झुके से लगे हैं,

जो मुझको फ़लक तक उड़ाते रहे हैं।


 

“ कहाँ ‘ हार्दिक ’ वो थकन लिख सकेगा,

जिसे आप जग से छिपाते रहे हैं। ”

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– हार्दिक जैन। ©

 इंदौर ।। मध्यप्रदेश ।।_______________________________________________________________________

 

 

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